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मेरे दोस्त

आज का दिन भी बहुत दर्द से गुजरा मेरे दोस्त। आज के दिन भी बहुत याद तू आया मेरे दोस्त।  आंख से बहते आंसू आज तो रुक जाते जरा।  आज तो सुबह से सावन की झड़ी थी ये दोस्त।। हिज़र का शब्द में किस्मत में लिखा लाई हूं। विसाल इस जन्म भी तुझ से ना होगा मेरे दोस्त। बख्श दे दिल को ना यूं कत्ल कर रहने दे। तेरी तलवार को हाजिर है मेरा सर मेरे दोस्त। कभी मिल जाऊं जो रास्ते में जरा मुस्काना। पर अपना अफसाना किसी को न सुनना मेरे दोस्त। अवंती सिंह

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